(न्यूज़लाइवनाउ-Odisha) ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा आज से शुरू हो रही है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा का विराट प्रतीक माना जाता है।
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के दिव्य रथों के दर्शन और उन्हें खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। इस वर्ष भी विशाल जनसमूह के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मुख्य मंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं। यह यात्रा भगवान के अपने भक्तों के बीच आने और उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन देने का प्रतीक मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान भगवान के दर्शन और रथ की रस्सी खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
रथ यात्रा का इतिहा
सपुरी की रथ यात्रा को दुनिया के सबसे प्राचीन और विशाल धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। इसकी परंपरा सदियों पुरानी है। हर वर्ष भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के लिए नए लकड़ी के रथ तैयार किए जाते हैं। इन रथों का निर्माण पारंपरिक विधि और निर्धारित नियमों के अनुसार विशेष कारीगरों द्वारा किया जाता है, जो पीढ़ियों से इस सेवा से जुड़े हुए हैं।
रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अलग-अलग विशाल रथों में विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। हजारों श्रद्धालु इन रथों को रस्सियों के माध्यम से खींचते हैं। यह दृश्य श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अनूठा उदाहरण माना जाता है।
रथ यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में ‘छेरा पहाड़ा’ रस्म शामिल है। इस अनुष्ठान में पुरी के गजपति महाराज स्वर्ण झाड़ू से रथों के आसपास सफाई करते हैं। यह संदेश देता है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।
इस वर्ष की तैयारियां
रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा सेवाएं, निगरानी प्रणाली, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सुविधाओं को मजबूत बनाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
पुरी की रथ यात्रा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। हर वर्ष यह महोत्सव लाखों श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा, समानता और आध्यात्मिक एकता का संदेश देता है। इसी कारण इसे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजनों में शामिल किया जाता है।
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