HPU फर्जी डिग्री मामला: एक और आरोपी गिरफ्तार, दूसरे जिलों में भी फैला है रैकेट

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : शिमला। फर्जी डिग्रियां बनाकर बेचने वाले गिरोह का एक और आरोपी शिमला पुलिस ने शुक्रवार देर शाम ठियोग से गिरफ्तार किया है। सूत्र बता रहे हैं कि गिरोह का मास्टरमाइंड कोई और है, जिसकी तलाश में अभी छापामारी जारी है। बताया जा रहा है रैकेट का जाल दूसरे जिलों में भी फैला हुआ है। उधर, बीते दिन पकड़े गए तीनों आरोपियों को मेडिकल के बाद जिला कचहरी में पेश किया गया जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। बता दें कि रैकेट के खुलासे के बाद पुलिस ने कई टीमें बनाकर जगह-जगह छापामारी की।  पुलिस पूछताछ में पकड़े गए तीन आरोपियों में से एक जयदेव ने खुलासा किया कि वह पेशे से खेतीबाड़ी करता है। वह फर्जी डिग्रियों को ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता था। उसके बदले उसे मोटी कमीशन मिलती थी। उधर, पकड़े गए दो अन्य आरोपियों ने बताया कि वह ठियोग के ही रहने वाले हैं। तीनों एक-दूसरे को जानते हैं। दोनों आरोपियों का दावा है कि वह क्रिकेट खेलने शिमला आए थे। आरोपी जयदेव से परिचित होने के कारण दोनों लिफ्ट के पास आए थे। इनमें से एक आरोपी शहर के एक निजी विश्वविद्यालय में होटल मैनेजमेंट के आखिरी सेमेस्टर का छात्र है जबकि दूसरा आरोपी कारोबारी है। खुलासे के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन सतर्क हो गया है। विवि के कार्यवाहक कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी ने बताया कि ठोस तथ्य सामने आने पर जो भी कार्रवाई बनेगी, की जाएगी।

यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि इस गिरोह से कोई विवि का कर्मचारी सीधे या परोक्ष रूप से तो नहीं जुड़ा है। किसी कर्मचारी की संलिप्तता जांच में पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई होगी। विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी ने कहा कि 2013 के बाद यूजी और पीजी की जो भी डिग्रियां जारी हुई हैं, उनमें खास तरह के सिक्योरिटी फीचर हैं। इससे पता लग सकता है कि डिग्री विवि से जारी हुई है या जाली तैयार की है। इसमें बाकायदा फोेटो, बार कोड, क्यूआर कोड और इसकी डुप्लीकेट निकाले जाने पर इसमें बाकायदा कॉपी लिखा आता है। डिग्री में कुछ खास नजर न आने वाले फीचर हैं। इसे माइक्रो व्यूअर से ही देखा जा सकता है। बताया कि विवि से जारी हो रही डिग्रियां डिजिटल और आधुनिक फीचर वाली हैं। विवि की डिग्री के आधार पर यदि किसी की सरकारी नौकरी लगती है तो डिग्री वेरिफिकेशन को विवि के पास आती है। ऐसे में फर्जी डिग्री को आसानी से पकड़ा जा सकता है। 
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