मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई, ईडी ने सत्येंद्र जैन से जुड़ी कंपनियों की ₹7.44 करोड़ की संपत्ति जब्त की
(न्यूज़लाइवनाउ-India) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि यह संपत्तियां उन कंपनियों की हैं, जिनका वास्तविक स्वामित्व और नियंत्रण आम आदमी पार्टी के नेता व पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के पास था। एजेंसी ने कहा कि यह कदम चल रही जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
कुल कीमत लगभग ₹7.44 करोड़
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के तहत कार्रवाई करते हुए सत्येंद्र जैन से जुड़ी कई कंपनियों की संपत्तियां जब्त की हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹7.44 करोड़ बताई गई है।
सत्येंद्र कुमार जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने धनशोधन की जांच शुरू की थी। आरोप था कि दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए (14 फरवरी 2015 से 31 मई 2017 तक) उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।
सीबीआई ने 3 दिसंबर 2018 को सत्येंद्र जैन, पूनम जैन और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद ईडी ने 31 मार्च 2022 को जैन के स्वामित्व वाली कंपनियों से जुड़ी ₹4.81 करोड़ की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। इसके बाद 27 जुलाई 2022 को अभियोजन शिकायत दायर की गई, जिसे 29 जुलाई 2022 को अदालत ने संज्ञान में लिया।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि नोटबंदी के तुरंत बाद नवंबर 2016 में, जैन के करीबी सहयोगी अंकुश जैन और वैभव जैन ने आय घोषणा योजना (IDS) 2016 के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा, भोगल शाखा में ₹7.44 करोड़ नकद जमा किए थे।
जांच से यह भी पता चला कि 2011 से 2016 के बीच अकिंचन डेवलपर्स प्रा. लि., प्रयास इन्फोसॉल्यूशंस प्रा. लि., मंगलायतन प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. और इंडो मेटल इम्पेक्स प्रा. लि. के खातों में कुल ₹16.53 करोड़ की राशि आई थी, जबकि इन कंपनियों का वास्तविक नियंत्रण सत्येंद्र जैन के पास था। आयकर विभाग और दिल्ली हाईकोर्ट ने अंकुश जैन और वैभव जैन को जैन का बेनामी माना। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी विशेष अनुमति याचिका और पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
ईडी ने पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत यह जानकारी सीबीआई से साझा की, जिसके आधार पर आगे जांच हुई और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसमें दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए सत्येंद्र जैन की और अधिक अनुपातहीन संपत्ति का ब्यौरा जोड़ा गया। इसी सिलसिले में अब ईडी ने ₹7.44 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति कुर्क की है।अब तक इस केस में ईडी ने कुल ₹12.25 करोड़ (₹4.81 करोड़ + ₹7.44 करोड़) की अवैध संपत्ति जब्त की है।
यह पूरी राशि उन कंपनियों की संपत्तियों के रूप में है, जिनका मालिकाना हक और नियंत्रण सत्येंद्र जैन के पास था। जल्द ही इस मामले में पीएमएलए के तहत पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की जाएगी। सुनवाई फिलहाल राउज़ एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली में जारी है।
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