भारत ने ट्रंप और यूरोपीय संघ को दिया कड़ा जवाब, अमेरिका की पोल खोली

(न्यूज़लाइवनाउ-India) भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचनाओं पर दो टूक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को साफ किया कि देश अपनी आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई भी आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान तब सामने आया जब रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने भारत की नीतियों पर सवाल उठाए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल आयात भारत की कोई पसंद नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य जरूरत है। उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से पारंपरिक तेल आपूर्ति बाधित हो गई थी और उस आपूर्ति को यूरोपीय देशों ने मोड़ लिया था। इस कारण भारत को ऊर्जा की आवश्यकता के लिए रूस की ओर रुख करना पड़ा। जायसवाल ने यह भी बताया कि उस समय स्वयं अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने का सुझाव दिया था ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके। भारत का उद्देश्य अपने नागरिकों को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराना है।

जायसवाल ने यूरोपीय संघ की उस आलोचना को भी खारिज किया जिसमें भारतीय तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं, वे खुद अब भी रूस से बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहे हैं। सरकार ने दस्तावेज़ों के माध्यम से बताया कि 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का माल व्यापार हुआ, और 2023 में सेवा व्यापार 17.2 अरब यूरो रहा। यह आंकड़ा भारत-रूस व्यापार से कहीं अधिक है।

इसके अलावा, यूरोपीय देशों ने 2024 में रूस से 16.5 मिलियन टन तरल प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदी, जो 2022 के 15.21 मिलियन टन से भी ज्यादा है। भारत सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि रूस और यूरोप के बीच कारोबार सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है—इसमें खाद, खनिज, रसायन, इस्पात, मशीनरी और ट्रांसपोर्ट उपकरण भी शामिल हैं।

भारत ने अमेरिका की दोहरी नीति को भी उजागर किया

सरकार ने बताया कि अमेरिका आज भी रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, पैलेडियम, उर्वरक और अन्य रासायनिक उत्पाद आयात करता है, जिनकी उसे परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यकता होती है। भारत ने तेल खरीदना तब शुरू किया था जब पारंपरिक आपूर्तियाँ यूरोपीय देशों को भेजी जाने लगी थीं और अमेरिका ने खुद भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने की सलाह दी थी।

सरकार ने अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की आलोचनाओं को “अनुचित और निराधार” करार देते हुए कहा कि भारत को एकतरफा तौर पर निशाना बनाना गलत है। गौरतलब है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत पर भारी शुल्क लगाने की चेतावनी दी थी।

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