(न्यूज़लाइवनाउ-West Bengal) पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती असंतुष्टि अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संगठन के सभी अहम पदों से इस्तीफा देकर सियासी हलचल तेज कर दी है। उनके इस फैसले को ममता बनर्जी की पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों और चुनावी हार के बाद उभरे असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
बारासात से कई बार लोकसभा पहुंच चुकी काकोली घोष ने हाल ही में जिला अध्यक्ष पद भी छोड़ा था। अब उन्होंने पार्टी के अन्य जिम्मेदार पदों से भी खुद को अलग कर लिया है। इस्तीफे के पीछे उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी, संगठन में बढ़ती अव्यवस्था और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी जैसे मुद्दों को प्रमुख कारण बताया।
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद से काकोली घोष नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज थीं। उन्होंने इशारों में चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसी I-PAC पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को किनारे कर बाहरी लोगों को ज्यादा महत्व दिया गया, जिससे संगठन कमजोर हुआ।
काकोली घोष ने यह भी कहा कि राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार और आपराधिक घटनाओं पर चिंता जताते हुए संकेत दिया कि इन मुद्दों का असर जनता के भरोसे पर पड़ा है। उनका मानना है कि पार्टी को फिर से पुराने जनसंपर्क मॉडल और जमीनी राजनीति की ओर लौटना चाहिए।
टीएमसी के भीतर यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब चुनावी हार के बाद पार्टी लगातार दबाव में है। कई नेताओं द्वारा संगठन और रणनीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि काकोली घोष जैसे पुराने और प्रभावशाली चेहरे का नाराज होना पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
हालांकि, काकोली घोष ने अभी सांसद पद छोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। उन्होंने यह जरूर कहा कि वह आम कार्यकर्ता के रूप में लोगों के बीच काम करती रहेंगी। दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व की ओर से उनके इस्तीफे पर फिलहाल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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