किस देश के पास है हैकर्स की सबसे बड़ी सेना?

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : लास वेगस में हर साल हैकर्स जमा होते हैं. इनके हुनर की निगरानी करके अमरीका के साइबर एक्सपर्ट ये समझते हैं कि हैकर्स का दिमाग़ कैसे काम करता है. वो कैसे बड़ा ऑपरेशन चलाते हैं.जिस वक़्त हैकर्स का ये मेला लास वेगस में लगा था, ठीक उसी वक़्त हैकर्स ने एक भारतीय बैंक पर साइबर अटैक करके क़रीब 3 करोड़ डॉलर की रक़म उड़ा ली. दुनिया भर में हर वक़्त सरकारी वेबसाइट से लेकर बड़ी निजी कंपनियों और आम लोगों पर साइबर अटैक होते रहते हैं.ये इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर थे और गणितज्ञ थे. रोज़ी कमाने के लिए इन्होंने इंटरनेट की दुनिया खंगालनी शुरू की. उस वक़्त साइबर सिक्योरिटी को लेकर बहुत ज़्यादा संवेदनशीलता नहीं थी और न जानकारी थी.इन रूसी एक्सपर्ट ने हैकिंग के साम्राज्य की बुनियाद रखी. इन रूसी हैकरों ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, दूसरे देशों की सरकारी वेबसाइट को निशाना बनाना शुरू किया. अपनी कामयाबी के क़िस्से ये अख़बारों और पत्रिकाओं को बताते थे.रूस के खोजी पत्रकार आंद्रेई शोश्निकॉफ़ बताते हैं कि उस दौर में हैकर्स ख़ुद को हीरो समझते थे. उस दौर में रूस में हैकर्स नाम की एक पत्रिका भी छपती थी.आंद्रेई बताते हैं कि उस दौर के हर बड़े रूसी हैकर का ताल्लुक़ हैकर पत्रिका से था. रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़एसबी को इन हैकर्स के बारे में मालूम था.मगर ताज्जुब की बात ये थी कि रूस की सरकार को इन हैकर्स की करतूतों से कोई नाराज़गी नहीं थी बल्कि वो तो इन हैकर्स का फ़ायदा उठाना चाहते थे.रूसी पत्रकार आंद्रेई शॉश्निकॉफ़ बताते हैं कि एफ़एसबी के चीफ़ निजी तौर पर कई रूसी हैकर्स को जानते थे.2007 में रूसी हैकर्स ने पड़ोसी देश एस्टोनिया पर बड़ा साइबर हमला किया. इन हैकर्स ने एस्टोनिया की सैकड़ों वेबसाइट को हैक कर लिया. ऐसा उन्होंने रूस की सरकार के इशारे पर किया था.अगले ही साल रूसी हैकर्स ने एक और पड़ोसी देश जॉर्जिया की तमाम सरकारी वेबसाइट को साइबर अटैक से तबाह कर दिया.रूसी पत्रकार आंद्रेई बताते हैं कि 2008 में जॉर्जिया पर हुआ साइबर हमला रूस के सरकारी हैकर्स ने किया था. ये रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी के कर्मचारी थे.रूस की सरकार को लगा कि वो फ्रीलांस हैकर्स पर बहुत भरोसा नहीं कर सकते. इससे बेहतर तो ये होगा कि वो अपनी हैकर आर्मी तैयार करें. रूसी हैकर्स की इसी साइबर सेना ने जॉर्जिया पर 2008 में हमला किया था.आज की तारीख़ में रूस के पास सबसे ताक़तवर साइबर सेना है.रूसी हैकर्स पर आरोप है कि उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में दख़लंदाज़ी की. उन्होंने व्हाइट हाउस पर साइबर हमला किया. नैटो और पश्चिमी देशों के मीडिया नेटवर्क भी रूसी हैकर्स के निशाने पर रहे हैं.रूस से हुए साइबर हमले में एक ख़ास ग्रुप का नाम कई बार आया है. इसका नाम है-फ़ैंसी बियर. माना जाता है कि हैकर्स के इस ग्रुप को रूस की मिलिट्री इंटेलिजेंस चलाती है. हैकरों के इसी ग्रुप पर आरोप है कि इसने पिछले अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में दख़लंदाज़ी की थी.रूसी पत्रकार आंद्रेई शोश्निकॉफ़ कहते हैं कि इन साइबर हमलों के ज़रिए रूस दुनिया को ये बताना चाहता है कि वो साइबर साम्राज्य का बादशाह है.90 के दशक में हॉलीवुड फ़िल्म मैट्रिक्स से प्रभावित होकर जिन रूसी साइबर इंजीनियरों ने हैकिंग के साम्राज्य की बुनियाद रखी थी, वो आज ख़ूब फल-फूल रहा है. आज बहुत से हैकर रूस की सरकार के लिए काम करते हैं.मगर, हैकिंग के इस खेल में रूस अकेला नहीं है.

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