इमरान खान का भाषण लिखा गया था पाक सेना द्वारा !

18 फरवरी को भारतीय सेना के अधिकारी केजेएस ढिल्लन ने पुलवामा में हुए हमले में पाकिस्तान के शामिल होने के सभी ठोस कारण मीडिया के सामने रखे थे।इसके ठीक अगले दिन 19 फरवरी की शाम इमरान खान ने एक रिकॉर्डेड वीडियो संदेश में अपने मुल्क को दहशतगर्दी का शिकार बताया।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना के इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर ने प्रेस कांफ्रेंस करके, जितने झूठ बोले, उनसे एक पूरा पाकिस्तानी पुराण लिखा जा सकता है। गफूर ने अपने ही वजीर-ए-आजम के झूठ को और आगे बढ़ाया है या यूं कहें कि यह साबित किया है कि उनके प्रधानमंत्री सेना की लिखी स्क्रिप्ट पढ़ते हैं। 18 फरवरी को भारतीय सेना के अधिकारी केजेएस ढिल्लन ने पुलवामा में हुए हमले में पाकिस्तान के शामिल होने के सभी ठोस कारण मीडिया के सामने रखे थे।इसके ठीक अगले दिन 19 फरवरी की शाम इमरान खान ने एक रिकॉर्डेड वीडियो संदेश में अपने मुल्क को दहशतगर्दी का शिकार बताया। साथ ही कहा कि अगर भारत सबूत देगा तो हम एक्शन भी लेंगे। लेकिन अपने भाषण के अंत में वो गीदड़ भभकी देने से नहीं चूके। उन्होंने कहा, ‘मैं भारतीय मीडिया के माध्यम से सुन और देख रहा हूं कि नेता पाकिस्तान से बदला लेने की अपील कर रहे हैं। यदि भारत सोचता है कि वह पाकिस्तान पर हमला करेगा, तो हम केवल सोचेंगे नहीं बल्कि जवाब देंगे।’ खान ने कहा, ‘जंग शुरू करना हमारे हाथ में है, यह आसान है लेकिन इसे समाप्त करना हमारे हाथ में नहीं है और कोई नहीं जानता कि क्या होगा।’आज पाकिस्तानी सेना के डीजी आईएसपीआर ने भी वही कहा, जो उन्होंने इमरान खान से कहलवाया था। उन्होंने पुलवामा में हुए हमले में पाकिस्तान का हाथ होने से इंकार करते हुए कहा कि उनका मुल्क भारत से बातचीत और अमन चाहता है। आसिफ गफूर ने कहा कि 1947 में बंटवारे को भारत आज भी स्वीकार नहीं कर पाया है। इतना ही नहीं गफूर ने बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के लिए भी भारत को जिम्मेदार ठहराया। जबकि बांग्लादेश सहित पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान ने वहां नरसंहार किया था, जिससे परेशान नागरिकों ने आजादी की जंग छेड़ दी थी।

गफूर ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से ही भारत से बात करना चाहता था। 2008 में भी पाकिस्तान ने भारत से बातचीत शुरू की थी, लेकिन मुंबई हमले की वजह से यह अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। लेकिन आसिफ गफूर की बातों से यह स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान में लोकतंत्र बचा ही नहीं है, वहां सेना ही राज करती आई है और आज भी कर रही है। इमरान खान सेना के हाथ की कठपुतली प्रधानमंत्री हैं और वही बात करते हैं, जो उन्हें कहने के लिए कहा जाता है। जबकि अमेरिका सहित दुनिया के सभी समझदार देश मानते हैं कि मुंबई में हुए 26/11 हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ था।पाकिस्तान हमेशा यह राग आलापता रहा है कि उसकी जमीन में आतंकवाद नहीं पल रहा है। यदि यह सच है तो फिर क्यों पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने ग्रे लिस्ट में रखा है। क्यों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा को बैन संगठन माना है। अमेरिका ने कई पाकिस्तानी संगठनों को आतंकी सूची में क्यों रखा है। और तो और पुलवामा आतंकी हमले के बाद जब दुनियाभर में पाकिस्तान की किरकिरी होना शुरू हुई तो आनन फानन में क्यों जमात उद दावा और फला-ए-इंसानियत को दोबारा प्रतिबंधित कर दिया।सभी इस सच को जानते हैं और पाकिस्तान बार-बार इसे साबित भी करता है कि उसके खाने के दांत अलग हैं और दिखाने के अलग। एक गरीब, तंगहाल, खस्ता अर्थव्यवस्था वाला देश, जिसका खर्च चीन और अरब देशों से मिली खैरात से चलता है, वो आतंक को पाल रहा है। नाक तक कर्जे में डूबा हुआ देश, अपने हालात सुधारने के बजाय भारत को अस्थिर करने के ख्वाब देखने में डॉलर खर्च कर रहा है। आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से हथियार लेता है और आतंकवादियों को सप्लाई करता है।यदि वह सचमुच आतंकवाद के खिलाफ होता तो उसकी नाक के नीचे दुनिया का मोस्ट वांटेड आतंकी ओसामा बिन लादेन न रहता। जिस आतंकी को अमेरिका दस साल तक खोजता रहा, वो पाकिस्तानी मिलिट्री अकादमी से कुछ किलोमीटर दूर एबटाबाद में ऐश कर रहा था। पाकिस्तान, उसकी सेना और आईएसआई पूरी दुनिया में बदनाम और एक्सपोज हो चुके हैं। फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। गौरतलब है कि पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी ने आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे।भारत इस बात के कई सबूत दे चुका है कि जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तानी सेना द्वारा खड़ा किया गया है और जैश-ए-मोहम्मद पर पाकिस्तानी सेना तथा आईएसआई का नियंत्रण है। इसमें पाकिस्तानी सेना की 100 प्रतिशत संलिप्तता है।

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