(न्यूज़लाइवनाउ-India) मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सोशल मीडिया और कुछ विदेशी रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के लिए भारत के समुद्री बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रहा है। इन दावों पर भारत सरकार ने स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है।
भारत ने दावे को बताया गलत
भारत के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से कहा कि ऐसी खबरें तथ्यहीन हैं और भारत के किसी भी पोर्ट का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जा रहा है। मंत्रालय के फैक्ट-चेक विभाग ने भी सोशल मीडिया पर इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए बताया कि भारत इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है और देश की नीति संतुलित कूटनीति पर आधारित है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र रुख अपनाता है और किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से पहले अंतरराष्ट्रीय नियमों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ा तनाव
मध्य-पूर्व में हाल के दिनों में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया। इसके जवाब में ईरान ने भी कई मिसाइल हमले किए और अमेरिकी तथा इजराइली ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। इस टकराव के कारण पूरे इलाके में सैन्य गतिविधियाँ बढ़ गई हैं और कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
युद्ध का असर समुद्री क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में हिंद महासागर के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया, जिसमें कई लोगों की मौत की खबर सामने आई। इस घटना ने संघर्ष को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर असर
इस युद्ध का प्रभाव केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्गों और समुद्री व्यापार पर खतरा बढ़ गया है, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
भारत ने इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाते हुए शांति और बातचीत पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है और सभी देशों को तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। साथ ही भारत ने यह भी दोहराया कि देश के बंदरगाहों या संसाधनों का इस्तेमाल किसी भी हमले के लिए नहीं किया जा रहा है।
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