60 साल में तीसरी बार सड़कों पर उतरी दिल्ली पुलिस, 1966 के आंदोलन में कई जवान हुए थे गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस के इतिहास में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन की घटना दर्ज हुई है। करीब छह दशक के दौरान तीसरी बार पुलिसकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर आवाज बुलंद की। इससे पहले 1966 और 2019 में भी पुलिसकर्मियों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया था। हालांकि, इन तीनों आंदोलनों की वजह अलग-अलग रही।

दिल्ली पुलिस के जवानों का ताजा प्रदर्शन 2 नवंबर 2026 को पुलिस मुख्यालय के बाहर देखने को मिला। शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला किए जाने से विभाग के एक वर्ग में नाराजगी थी। इसी फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, जिनमें महिला जवान भी शामिल थीं, मुख्यालय के बाहर इकट्ठा हुए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वकीलों के दबाव में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तबादले की कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को बैठक बुलाकर जवानों की शिकायतें सुननी पड़ीं। शुरुआती बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, लेकिन लगातार बातचीत के बाद रात करीब आठ बजे आंदोलन समाप्त हो गया।

1966 में पहली बार बड़े स्तर पर हुआ था पुलिसकर्मियों का आंदोलन

दिल्ली पुलिस के इतिहास में मई 1966 का आंदोलन बेहद अहम माना जाता है। उस समय 7,000 से अधिक पुलिसकर्मी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए थे। जवानों की प्रमुख मांगों में बेहतर कार्य परिस्थितियां, ड्यूटी के निर्धारित घंटे और वेतन-भत्तों में सुधार शामिल थे।

उस दौर में दिल्ली में मुख्यमंत्री का पद नहीं था और केंद्र सरकार के सीधे प्रशासन के तहत राष्ट्रपति शासन लागू था। तत्कालीन सरकार ने इस आंदोलन को सख्ती से दबाने का फैसला किया था। गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिसकर्मियों को बैरकों में बंद कर दिया था। वहीं, आंदोलन में शामिल कई जवानों को गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।इस कार्रवाई के बाद लंबे समय तक पुलिसकर्मियों ने वेतन वृद्धि और दूसरी सेवा संबंधी मांगों को लेकर इस तरह का बड़ा विरोध नहीं किया।

तीस हजारी कोर्ट विवाद के बाद 2019 में फिर हुआ था प्रदर्शन

दिल्ली पुलिसकर्मियों का दूसरा बड़ा आंदोलन 5 नवंबर 2019 को हुआ था। इसकी पृष्ठभूमि तीस हजारी अदालत परिसर में पुलिस और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प थी। इस घटना के बाद पुलिसकर्मियों ने वकीलों पर मारपीट करने के आरोप लगाए थे।

इसके विरोध में हजारों पुलिसकर्मी आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस के पुराने मुख्यालय के बाहर जमा हो गए थे। करीब 11 घंटे तक चले इस प्रदर्शन में जवानों ने अपनी सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दे उठाए। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से उचित कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ था।

हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थीं पुनर्विचार याचिकाएं

2019 के आंदोलन को शांत कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों को भरोसा दिलाया था कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी।

दरअसल, 3 नवंबर 2019 को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में वकीलों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद पुलिस विभाग और केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अदालत में पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं।

हालांकि, 6 नवंबर 2019 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत का कहना था कि पहले दिया गया आदेश स्पष्ट है और उसमें किसी संशोधन या स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है।

2026 के आंदोलन की वजह क्या रही?

इस बार विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच हुई कहासुनी और हाथापाई से हुई थी। इस दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी।

घटना के बाद वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इसके बाद 28 अक्टूबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया।

एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को विशेष पुलिस इकाई महिला एवं बाल (SPUWAC) में भेजा गया, जबकि इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सुरक्षा इकाई में तैनात किया गया। अधिकारियों के तबादले के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी, लेकिन पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया।

इसी नाराजगी के चलते 2 नवंबर को पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर जुटे और दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी तैनाती पर वापस भेजने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, वर्दी के सम्मान और शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया।इस तरह 1966 के बाद 2019 और अब 2026 में दिल्ली पुलिसकर्मियों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। खास बात यह है कि पिछले दोनों बड़े प्रदर्शनों की तरह इस बार भी पुलिस और वकीलों के बीच टकराव ही विरोध की मुख्य वजह बना।

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