जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा उलटफेर: आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी का इस्तीफा मंजूर, श्रीनगर लोकसभा सीट हुई खाली
: जम्मू-कश्मीर की सियासत में नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ा झटका लगा है। श्रीनगर से सांसद रहे आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी का लोकसभा की सदस्यता से दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनका त्यागपत्र 3 नवंबर 2026 से प्रभावी मानते हुए मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद श्रीनगर संसदीय क्षेत्र की सीट रिक्त हो गई है। लोकसभा सचिवालय ने भी इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
पार्टी छोड़ने के बाद संसद से भी तोड़ा नाता
आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी ने 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस से अपना राजनीतिक रिश्ता समाप्त करने के साथ ही लोकसभा की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया था। पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय से चल रहे मतभेदों के बाद उन्होंने यह कदम उठाया।
बडगाम स्थित बेहिश्त-ए-जहरा पार्क में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने समर्थकों के सामने इस्तीफे की घोषणा की थी। रूहुल्ला ने पार्टी नेतृत्व पर जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया था। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष दर्जे की बहाली के मुद्दे पर पार्टी के रुख को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी।
उमर अब्दुल्ला की कार्यशैली पर उठाए सवाल
नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होते समय रूहुल्ला ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि जिस पद पर उमर अब्दुल्ला बैठे हैं, वह उनके साथ-साथ आम जनता के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री को अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान दूसरों के सामने गिरवी रखने की जरूरत नहीं थी। रूहुल्ला ने यह भी कहा कि वह दुआ करते हैं कि उन्हें कभी सत्ता के लिए ऐसी मजबूरी का सामना न करना पड़े, जिसमें अपने स्वाभिमान से समझौता करना पड़े।
उन्होंने अपने सम्मान और आत्मसम्मान की बात करते हुए विरोधियों को बडगाम आकर उनकी स्थिति देखने की चुनौती भी दी थी।
फारूक अब्दुल्ला को भी बनाया था निशाना
रूहुल्ला ने अपने बयान में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर भी निशाना साधा था। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को अक्षम बताते हुए फारूक अब्दुल्ला से कहा था कि उन्हें अपने बेटे को कुरान की शिक्षा देनी चाहिए।
उनका आरोप था कि विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी के दबाव के चलते उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर पार्टी के पुराने रुख से पीछे हटने का संकेत दिया था।
दूसरी ओर, जब फारूक अब्दुल्ला से रूहुल्ला के इस्तीफे और उनके आरोपों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था।
नई राजनीतिक पार्टी बनाने के भी दिए थे संकेत
पार्टी और संसद दोनों से अलग होने के बाद रूहुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में नई राजनीतिक पहल शुरू करने की संभावना भी जताई थी। उन्होंने संकेत दिया था कि यदि ईमानदार और समान विचारधारा वाले युवा आगे आते हैं, तो उनके साथ मिलकर एक नया राजनीतिक मंच तैयार किया जा सकता है।
अब लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इस्तीफा मंजूर किए जाने के बाद श्रीनगर की संसदीय सीट औपचारिक रूप से खाली हो गई है। रूहुल्ला के इस फैसले से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
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