(न्यूज़लाइवनाउ-India) सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी से जुड़ी याचिका पर बहस तेज़ हुई।
पश्चिम बंगाल के एक पुलिस अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर आरोप लगाया कि उसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने जवाब दिया कि एजेंसी को कोई “हथियार” नहीं बनाया गया, बल्कि उसे डराया और आतंकित किया गया है।”
यह सुनवाई न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की तीन सदस्यीय बेंच कर रही थी, जिसमें ईडी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने पुलिस अधिकारियों के साथ तलाशी स्थल पर पहुंचीं और जांच में अवरोध उत्पन्न किया।
कोर्ट ने इस मामले की आगे की सुनवाई को 18 मार्च तक स्थगित कर दिया। पिछले हफ्ते वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की तबीयत खराब होने के कारण यह सुनवाई नहीं हो पाई थी।
हुआ क्या था?
ईडी ने 8 जनवरी को कोयला तस्करी से जुड़े मनी-लाउंड्रिंग जाँच के सिलसिले में आई-पैक के कोलकाता कार्यालय और उसके निदेशक के घर पर तलाशी अभियान चलाया। उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं; ईडी का दावा है कि उन्होंने कुछ दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी अपने साथ ले ली, जिससे जांच प्रभावित हुई।
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस तथा राज्य प्रशासन ने उसके अधिकारियों को जाँच प्रक्रिया पूरी करने से रोका और इस कारण एजेंसी को अपने कर्तव्यों का निर्वहन मुश्किल हुआ।
मुख्यमंत्री का पक्ष
ममता बनर्जी ने कोर्ट में अपनी ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल कर इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह वहाँ इसलिए गई थीं क्योंकि उन्हें सूचित किया गया था कि तलाशी के दौरान उनकी पार्टी से जुड़ा संवेदनशील चुनावी डेटा एक्सेस किया जा रहा है, जो विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ा था। उन्होंने यह दलील दी कि उन दस्तावेज़ों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को वापस लेने का उनका कदम निर्दयी जांच का रोड़ा बनने के लिए नहीं, बल्कि अपने पार्टी के डेटा की रक्षा के लिए था।
उन्होंने यह भी कहा कि कोयला घोटाला मामले में न तो तृणमूल कांग्रेस और न ही उसके किसी पदाधिकारी को कोई आरोपित नहीं कहा गया है, अतः ईडी का पार्टी के आंतरिक डेटा पर दावा करना वैधानिक अधिकार से परे है।
ईडी ने कोर्ट से यह निर्देश माँगा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाए क्योंकि एजेंसी का मानना है कि तलाशी अभियान के समय जांच में व्यवधान और अवरोध उत्पन्न किया गया।
ईडी ने यह भी तर्क दिया है कि उसके अधिकारी डराए और प्रताड़ित किए गए जसके कारण उन्हें अपना काम स्वतंत्र रूप से करने में कठिनाई हुई।
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