(न्यूज़लाइवनाउ-USA) अमेरिका और ईरान के बीच चर्चा और तनाव दोनों एक साथ जारी हैं, लेकिन क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से बढ़ी हैं।
अमेरिकी रक्षा बलों ने सिर्फ पिछले एक दिन में मध्य पूर्व दिशा की ओर 50 से ज़्यादा अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को भेजा है। ये विमानों में एफ-22, एफ-35 और एफ-16 जैसे उन्नत सेनानी शामिल हैं, जिनका उपयोग हवाई श्रेष्ठता और तेज़ प्रतिक्रिया के लिए किया जाता है।
इस सैन्य तैनाती को अमेरिका की वायु और नौसेना शक्ति को मजबूत करने का संकेत माना जा रहा है, खासकर उस समय जब दोनों देशों के प्रतिनिधि जिनेवा में अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में बैठे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह कदम क्षेत्र में अमेरिका की मजबूती बरक़रार रखने और संभावित खतरों का सामना करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
साथ ही, अमेरिका ने विमानवाहक पोत समूह को भी मध्य पूर्व की ओर रवाना कर दिया है, जिससे उसकी समुद्री शक्ति भी बढ़ाई जा रही है। इस समूह के जल्द ही रणनीतिक इलाके के करीब पहुँचने की भविष्यवाणी की जा रही है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान की ओर से इस सैन्य ताकत के प्रदर्शन पर कड़ा रुख देखा गया है। उच्च धार्मिक नेता और सरकारी सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने किसी भी आक्रमण का प्रयास किया तो उसका जवाब इतना शक्तिशाली होगा कि कई शक्ति संपन्न बल “उठ भी नहीं पाएँगे”। इस तरह की बेबाक चेतावनी से क्षेत्र में तनाव और तेज़ होने की आशंका बढ़ गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह सैन्य बढ़ोतरी और कूटनीतिक बातचीत दोनों ही एक साथ चल रहे हैं — अमेरिका सैन्य दबाव के साथ साथ वार्ता के ज़रिये स्थिरता को भी तरजीह दे रहा है, लेकिन ईरान को कठोर संदेश भी भेज रहा है कि यदि उसकी “लाल रेखाएँ” पार की गईं तो वह पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका ने पिछले 24 घंटों में मध्य पूर्व में 50+ लड़ाकू जेट भेज कर क्षेत्रीय सैन्य स्थिति को कड़ा किया है, वहीं ईरान ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता भी जारी है।
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