(न्यूज़लाइवनाउ-Saudi Arab) दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शामिल सऊदी अरब ने अगस्त महीने के लिए एशियाई ग्राहकों को बेचे जाने वाले अपने प्रमुख कच्चे तेल की आधिकारिक बिक्री कीमत (OSP) में 11 डॉलर प्रति बैरल की भारी कमी कर दी है। पिछले दो दशक से अधिक समय में यह सबसे बड़ी मासिक कटौती मानी जा रही है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की मांग कमजोर पड़ रही है और उत्पादक देशों के बीच बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मांग अपेक्षा से कम रही है। चीन सहित कई एशियाई देशों में रिफाइनरियों की खरीद सुस्त पड़ी है। दूसरी ओर, ओपेक+ देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले और मध्य पूर्व में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कम होने से बाजार में पर्याप्त तेल उपलब्ध होने की संभावना बढ़ गई है। इसी कारण सऊदी अरब ने अपने ग्राहकों को आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कीमतों में बड़ी कटौती की है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता रहता है, तो आयात बिल कम हो सकता है। इससे पेट्रोलियम कंपनियों की लागत घटेगी और भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही सरकार पर ईंधन सब्सिडी और महंगाई का दबाव भी कम होने की संभावना रहती है।
हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों में बदलाव केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करता। टैक्स, परिवहन लागत, रुपये-डॉलर की विनिमय दर और सरकारी नीतियां भी अंतिम कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
सऊदी अरब के इस कदम से अन्य तेल उत्पादक देशों पर भी दबाव बढ़ सकता है कि वे अपनी कीमतों में बदलाव करें। यदि उत्पादन अधिक और मांग कमजोर बनी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव आ सकता है। इससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों को राहत मिलेगी, जबकि तेल निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की आय प्रभावित हो सकती है।
अब निवेशकों और ऊर्जा बाजार की नजर ओपेक+ की आगामी रणनीति, वैश्विक मांग, चीन की खरीद, अमेरिका की आर्थिक गतिविधियों और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर रहेगी। यदि मांग में तेजी नहीं आती और उत्पादन ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का दौर कुछ समय तक जारी रह सकता है।
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