संजय राउत चुनाव आयोग पर भड़के , बोले शिवसेना को खत्म करने की हो रही है कोशिश

चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को 'असली' शिवसेना बताया, इस पर उद्धव गुट के सांसद संजय राउत भड़के नजर आए। राउत ने चुनाव आयोग के फैसले को गलत बताते हुए जमकर निशाना साधा।

(एन एल एन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को ‘असली’ शिवसेना बताया, इस पर उद्धव गुट के सांसद संजय राउत भड़के नजर आए। राउत ने चुनाव आयोग के फैसले को गलत बताते हुए जमकर निशाना साधा। राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना के तौर पर मान्यता देने का निर्वाचन आयोग का फैसला ‘लोकतंत्र की हत्या’ है। इसके खिलाफ उनकी पार्टी लोगों के पास जाएगी। राउत ने आगे कहा, आयोग का यह फैसला ‘राजनीतिक हिंसा’ का काम है। इसका उद्देश्य डर, बदले की भावना से शिवसेना को खत्म करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राजनीतिक दलों को चुनाव प्रहरी से राजनीतिक दल की परिभाषा पूछने की जरूरत है।

राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘चुनाव आयोग का आदेश शिवसेना को खत्म करने के लिए एक तरह की राजनीतिक हिंसा है। यह डर और बदले की भावना से किया जा रहा है।’ उन्होंने शिवसेना का जिक्र करते हुए कहा कि एक पार्टी है जो 50 साल से अधिक पुरानी है और जिसके कुछ विधायक और सांसद दबाव में दलबदल कर गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को कानून, संविधान और लोगों की इच्छा का उल्लंघन बताया। राउत ने कहा, ‘पार्टी और लोग उद्धव ठाकरे के साथ हैं और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।’ चुनाव आयोग द्वारा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े को असली शिवसेना मानने के एक दिन बाद उद्धव ठाकरे ने अपने धड़े के नेताओं की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में भविष्य के कदम पर चर्चा हो सकती है। इस बैठक में पार्टी नेता और प्रवक्ताओं समेत बड़े नेता शामिल हो सकते हैं। यह बैठक ठाकरे के निवास मातोश्री में होगी। चुनाव आयोग के फैसले को शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

 

आयोग ने कहा कि शिवसेना का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है। बिना किसी चुनाव के पदाधिकारियों के रूप में एक मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से नियुक्त किया गया है। इस तरह की पार्टी संरचनाएं भरोसा पैदा करने में विफल रहती हैं। चुनाव आयोग ने पाया कि 2018 में संशोधित शिवसेना का संविधान भारत के चुनाव आयोग को नहीं दिया गया। 1999 के पार्टी संविधान में लोकतांत्रिक मानदंडों को पेश करने के अधिनियम को संशोधनों ने रद्द कर दिया था, जिसे आयोग के आग्रह पर दिवंगत बालासाहेब ठाकरे द्वारा लाया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि शिवसेना के मूल संविधान के अलोकतांत्रिक मानदंड, जिन्हें 1999 में आयोग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था, को गोपनीय तरीके से वापस लाया गया, जिससे पार्टी एक जागीर के समान हो गई।

आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक लोकाचार और पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करने और नियमित रूप से अपनी संबंधित वेबसाइटों पर अपनी पार्टी के आंतरिक कामकाज के पहलुओं का खुलासा करने की भी सलाह दी, जैसे कि संगठनात्मक विवरण, चुनाव आयोजित करना, संविधान की प्रति और पदाधिकारियों की सूची।

Leave A Reply