बिना आरएसएस समर्थन वाले नेता को समर्थन दे सकते हैं राहुल गांधी।

बड़ा सवाल उठता है कि क्‍या बसपा सुप्रीमो मायावती और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी 2019 के चुनाव में उनको विपक्ष का नेता मानने को तैयार होंगे?

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : कांग्रेस ने रविवार को आगामी 2019 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनाव से पहले और चुनाव के बाद गठबंधन के लिए अधिकृत करते हुए कहा कि बीजेपी को सत्‍ता से बेदखल करने के अभियान में राहुल गांधी ही पार्टी का चेहरा होंगे। इस तरह से एक प्रकार से कांग्रेस ने उनको पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर दिया है। इससे कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया है कि विपक्ष की धुरी अब सोनिया गांधी नहीं राहुल गांधी होंगे। यहीं से बड़ा सवाल उठता है कि क्‍या बसपा सुप्रीमो मायावती और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी 2019 के चुनाव में उनको विपक्ष का नेता मानने को तैयार होंगे? इन विपक्षी नेताओं की मंशा चाहे जो हों लेकिन कांग्रेस के ऐलान के बाद अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में स्थिति साफ करते हुए कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह किसी भी ऐसे प्रत्‍याशी का समर्थन करेंगे जो बीजेपी और आरएसएस को हराएगा। मंगलवार शाम को महिला पत्रकारों से बातचीत के एक कार्यक्रम में सूत्रों के मुताबिक जब उनसे पूछा गया कि क्‍या वह प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती या ममता बनर्जी के नाम का समर्थन करेंगे तो राहुल गांधी ने यह जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक 2019 के आम चुनावों में कांग्रेस की रणनीति के संबंध में राहुल गांधी ने कहा कि मुख्‍य मुद्दा यूपी और बिहार में जीत हासिल से है क्‍योंकि इन दोनों राज्‍यों की कुल मिलाकर लोकसभा में 22 प्रतिशत सीटें हैं। इसलिए इन राज्‍यों में बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस गठबंधन को तैयार है। हालांकि साथ ही यह भी कहा कि तेलुगु देसम पार्टी (टीडीपी) और शिवसेना जैसे बीजेपी के सहयोगी दलों ने एनडीए का दामन छोड़ दिया है। इसका अतिरिक्‍त लाभ भी कांग्रेस को मिलेगा। खुद के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं के बारे में पूछे गए सवाल पर कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह काफी हद तक तात्‍कालिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। राहुल गांधी का यह बयान ऐसे वक्‍त आया है जब कांग्रेस ने भले ही 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में उनके नाम को आगे बढ़ाया है लेकिन पार्टी ने इसके साथ ही यह भी संकेत दिया कि उसे शीर्ष पद के लिए विपक्ष में से किसी भी ऐसे किसी उम्मीदवार को स्वीकार करने में एतराज नहीं है जिसकी पीठ पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का हाथ नहीं हो। पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने यह संकेत देते हुए यह भी कहा कि भाजपा को 2019 में सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस राज्‍यों में विभिन्न दलों का गठबंधन बनाने पर गौर करेगी।

Leave A Reply