मोदी सरकार पर उद्धव ठाकरे का ये बयान इशारा है हिन्दू वोटों के एकता की तरफ और झटका है कांग्रेस के लिए
(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली। जिस शिवसेना से कांग्रेस पार्टी ने हिन्दू वोटों में सेंध मारने के लिए सबसे ज्यादा आशा और उम्मीद लगा रखी थी आख़िरकार उसी शिवसेना ने जहाँ कांग्रेस को दिया है एक बड़ा झटका तो वही खुश कर दिया है तमाम उन हिन्दू संगठनो को जो किसी भी हाल में नहीं चाह रहे थे हिन्दू वोटों का आने वाले लोकसभा चुनावो में विभाजन । हिन्दू और हिंदुत्व की मूल विचारधारा पर चल रही शिवसेना के बागी तेवरों में कांग्रेस अपना हित देख रही थी लेकिन आख़िरकार एन मौके पर उद्धव ठाकरे के बयान ने कांगेस को दिया है एक बहुत बड़ा झटका। ये मौक़ा है तब का जब मोदी सरकार ने अपना अंतरिम बजट पेश किया । इस बजट के ऊपर आने वाले लोकसभा चुनावों की पटकथा लिखी जाने वाली थी। बजट पेश होने के तुरंत बाद जहाँ भाजपा के खिलाफ संगठित हुए विपक्ष ने इस पर हल्ला बोल दिया तो वहीँ वो बड़े आशा से शिवसेना को भी देख रहे थे । बजट पेश होने के फ़ौरन बाद इस पर कांग्रेस , समाजवादी पार्टी , ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल आदि ने हल्ला बोला और मोदी सरकार की आलोचना की।
पर शिवसेना की तरफ देखने का उन्हें उनके अनुसार लाभ नहीं मिला । शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा है कि देशभर के लोगों को जिसकी उम्मीद थी। मोदी सरकार ने वो करके दिखा दिया। सामना में लिखा है कि देशभर में इस वर्ष भले ही कम बरसात हुई है फिर भी लोकसभा चुनाव से पहले आखिरी बजट में मोदी सरकार घोषणाओं की बारिश करेगी, यही उम्मीद थी। वित्त विभाग का अतिरिक्त कामकाज संभालने वाले रेलमंत्री पीयूष गोयल द्वारा शुक्रवार को रखे गए ‘अंतरिम’ बजट ने अपेक्षाओं को भंग नहीं किया है। नौकरीपेशा लोगों को मिली राहत पर मुखपत्र में लिखा है कि 5 लाख रुपए तक की आय को करमुक्त करने का एक बड़ा निर्णय घोषित किया गया है, इस को भी शिवसैनिकों ने सराहा है। यह बजट ‘अंतरिम’ था फिर भी चुनाव से पहले सरकार के लिए यह आखिरी मौका होने से उसका स्वरूप ‘पूर्ण बजट’ जैसा रखा जाएगा और इस मौके का पूर्णत: लाभ उठाने की कोशिश सरकार द्वारा की जाएगी, ये काले पत्थर की सफेद लकीर थी। शिवसेना का ये बयान हिन्दूवादी संगठनो में ख़ुशी की लहर दौड़ा गया और आने वाले चुनावों में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी को एक साथ मिल कर चुनाव लड़ने की आशा जताई जाने लगी जिसके चलते हिन्दू वोटों का बंटवारा न होने की भी संभावना है ।